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चीन का अनोखा AI कॉलर: अब पालतू जानवरों की भाषा इंसानी भाषा में बदलने का दावा

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चीन के एक स्टार्टअप ने AI आधारित ‘मेंग शियाओयी’ कॉलर पेश किया है, जो पालतू जानवरों की आवाज और हाव-भाव को इंसानी भाषा में बदलने का दावा करता है। इस तकनीक पर सवाल भी उठ रहे,

चीन से आई एक नई तकनीक ने दुनिया भर के पेट लवर्स और टेक एक्सपर्ट्स के बीच चर्चा छेड़ दी है। एक स्टार्टअप ने दावा किया है कि उसने ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कॉलर बनाया है, जो पालतू जानवरों की आवाज और उनके व्यवहार को समझकर उसे इंसानी भाषा में बदल सकता है। इस डिवाइस का नाम ‘मेंग शियाओयी’ बताया जा रहा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस चल रही है।

इस डिवाइस को पालतू जानवरों के लिए एक स्मार्ट कम्युनिकेशन टूल के रूप में पेश किया गया है। इसे जानवर के गले में कॉलर की तरह पहनाया जाता है। इसमें माइक्रोफोन और मोशन सेंसर लगाए गए हैं, जो कुत्तों और बिल्लियों की आवाज के साथ-साथ उनके हाव-भाव को भी रिकॉर्ड करते हैं। कंपनी का दावा है कि यह डेटा एआई सिस्टम को भेजा जाता है, जहां इसे इंसानी भाषा में बदलने की कोशिश की जाती है।

कंपनी के अनुसार यह तकनीक एक एडवांस्ड एआई मॉडल पर आधारित है, जिसे लाखों जानवरों की आवाजों और व्यवहार पैटर्न पर ट्रेन किया गया है। यह सिस्टम करीब 20 से ज्यादा भावनाओं को पहचानने में सक्षम होने का दावा करता है, जैसे भूख, खेलना, डर या आराम की जरूरत। हालांकि अभी तक इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।

यह कॉलर सिर्फ जानवरों की आवाज को समझने तक सीमित नहीं है। कंपनी का कहना है कि यह दोतरफा कम्युनिकेशन भी संभव बनाता है। यानी मालिक अगर कुछ बोले, तो यह डिवाइस उसे जानवरों की आवाज में बदलकर पालतू तक पहुंचा सकता है। इससे मालिक और पेट के बीच बातचीत जैसा अनुभव मिलने का दावा किया जा रहा है।

डेमो वीडियो में दिखाया गया है कि जब एक बिल्ली म्याऊं करती है, तो ऐप पर मैसेज आता है “मुझे खेलना है”। वहीं कुत्ते की भौंक को “मुझे भूख लगी है” जैसे संदेश में बदलकर दिखाया गया है। यही फीचर इस डिवाइस को चर्चा में ला रहा है।

इस AI कॉलर का वजन लगभग 27 ग्राम बताया गया है, जिससे यह पालतू जानवरों के लिए हल्का माना जा रहा है। इसके साथ एक वायरलेस डिवाइस भी दिया जाता है, जो सीधे मोबाइल ऐप से कनेक्ट रहता है और मालिक को नोटिफिकेशन भेजता है।

यह तकनीक चीन की बड़ी टेक इकोसिस्टम से भी जुड़ी बताई जा रही है और इसे Alibaba Cloud के AI मॉडल पर आधारित बताया गया है। इसी वजह से इसकी तकनीकी क्षमता को लेकर और ज्यादा चर्चा हो रही है।

इस कॉलर की कीमत लगभग 799 युआन यानी करीब 11,000 रुपये बताई जा रही है और इसकी बिक्री जल्द शुरू होने वाली है। लॉन्च से पहले ही इसे हजारों प्री-ऑर्डर मिल चुके हैं, जिससे इसकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

हालांकि इस तकनीक पर सवाल भी उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग इसकी 95% सटीकता के दावे पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। कुछ टेक विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों की भावनाओं को पूरी तरह इंसानी भाषा में बदलना अभी भी वैज्ञानिक रूप से बेहद जटिल काम है।

कुछ पेट लवर्स का मानना है कि उन्हें अपने पालतू जानवरों को समझने के लिए किसी मशीन की जरूरत नहीं है, क्योंकि समय के साथ इंसान और जानवर के बीच खुद एक समझ विकसित हो जाती है।

कुल मिलाकर यह AI कॉलर तकनीक फिलहाल चर्चा और विवाद दोनों में है। आने वाले समय में ही पता चलेगा कि यह वास्तव में क्रांतिकारी आविष्कार है या सिर्फ एक हाई-टेक दावा।

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